Saturday, February 16, 2013

ज़बानों दिल में बहम इरतबात हो ऐसा
कि जो ज़बान कहे दिल को एतबार आए
-जिगर मुरादाबादी

[(बहम = परस्पर, आपस में), (इरतबात = मेल)]

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