mir-o-ghalib
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Spiritual Science
Tuesday, February 19, 2013
दर्द हल्का है, साँस भारी है
जिये जाने की रस्म जारी है
आप के बाद हर घड़ी हमने
आप के साथ ही गुज़ारी है
-गुलज़ार
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