सब्र हर बार अख्तियार किया
हम से होता नहीं हज़ार किया
आदतन तुम ने कर दिये वादे
आदतन हम ने ऐतबार किया
हमने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक के अपना ही इन्तज़ार किया
अब ना माँगेंगे ज़िन्दगी या रब
ये गुनाह हम ने एक बार किया
-गुलज़ार
हम से होता नहीं हज़ार किया
आदतन तुम ने कर दिये वादे
आदतन हम ने ऐतबार किया
हमने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक के अपना ही इन्तज़ार किया
अब ना माँगेंगे ज़िन्दगी या रब
ये गुनाह हम ने एक बार किया
-गुलज़ार
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