जब भी दिल खोल के रोए होंगे,
लोग आराम से सोए होंगे ।
वो सफ़ीने जिन्हें तूफ़ाँ न मिले,
नाख़ुदाओं ने डुबोए होंगे ।
[(सफ़ीना = किश्ती, नाव), (नाख़ुदा = मल्लाह, नाविक)]
-अहमद फ़राज़
लोग आराम से सोए होंगे ।
वो सफ़ीने जिन्हें तूफ़ाँ न मिले,
नाख़ुदाओं ने डुबोए होंगे ।
[(सफ़ीना = किश्ती, नाव), (नाख़ुदा = मल्लाह, नाविक)]
-अहमद फ़राज़
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