Saturday, February 23, 2013

जब भी दिल खोल के रोए होंगे,
लोग आराम से सोए होंगे ।

वो सफ़ीने जिन्हें तूफ़ाँ न मिले,
नाख़ुदाओं ने डुबोए होंगे ।

[(सफ़ीना = किश्ती, नाव), (नाख़ुदा = मल्लाह, नाविक)]

-अहमद फ़राज़

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