Saturday, June 15, 2013

जिसको सुकून कह्ते हैं अक्सर नहीं मिला
नींदें नहीं मिली कभी बिस्तर नहीं मिला

दहलीज़ अपनी छोड़ दी जिसने भी एक बार
दीवारों-दर ही उसको मिले घर नहीं मिला

सारी चमक हमारे पसीने की है जनाब
विरसे में हमको कोई भी ज़ेवर नहीं मिला
-हस्तीमल 'हस्ती'

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