इतना भी ना-उमीद दिल-ए-कम-नज़र न हो
मुमकिन नहीं कि शाम-ए-अलम की सहर न हो
-नरेश कुमार शाद
(दिल-ए-कम-नज़र = संकीर्ण दृष्टि वाला दिल), (शाम-ए-अलम = दुःख की शाम)
मुमकिन नहीं कि शाम-ए-अलम की सहर न हो
-नरेश कुमार शाद
(दिल-ए-कम-नज़र = संकीर्ण दृष्टि वाला दिल), (शाम-ए-अलम = दुःख की शाम)
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