अब न मेंहदी महावर की बातें करो,
अब तो खुशियों पे भी आक्रमण हो गया।
आँख बरसी तो ये शुष्क मन की धरा,
नम हुई , पीर का अंकुरण हो गया
-आर० सी० शर्मा "आरसी"
अब तो खुशियों पे भी आक्रमण हो गया।
आँख बरसी तो ये शुष्क मन की धरा,
नम हुई , पीर का अंकुरण हो गया
-आर० सी० शर्मा "आरसी"
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