mir-o-ghalib
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Spiritual Science
Sunday, June 23, 2013
पी लेना छलकती आँखों से
बादल के भरोसे न रहना
कब साज़ सरकती सांसों का
रुक जाये, तरसते न रहना
-रवीन्द्र कृष्ण 'मजबूर'
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