जानता हूँ की विवादों में रहा,
ये क्या कम है तेरी यादों में रहा |
प्रेम के मन में खजाने लेकर ,
मैं हिकारत के तकाजों में रहा|
बात उपलब्धियों कीमत पूछो,
फूल होकर भी किताबों में रहा|
आप चाहें तो बुजदिली कह लें,
मैं जो मज़बूत इरादों में रहा|
-आर० सी० शर्मा "आरसी"
ये क्या कम है तेरी यादों में रहा |
प्रेम के मन में खजाने लेकर ,
मैं हिकारत के तकाजों में रहा|
बात उपलब्धियों कीमत पूछो,
फूल होकर भी किताबों में रहा|
आप चाहें तो बुजदिली कह लें,
मैं जो मज़बूत इरादों में रहा|
-आर० सी० शर्मा "आरसी"
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