Monday, May 30, 2016

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है

तेरा सुतवाँ जिस्म है तेरा
बोल कि जाँ अब तक तेरी है

देख के आहनगर की दुकाँ में
तुंद हैं शोले सुर्ख़ है आहन

(आहनगर = लोहार), (तुंद = तेज़, भीषण), (आहन = लोहा)

खुलने लगे क़ुफ़्लों के दहाने
फैला हर इक ज़न्जीर का दामन

(क़ुफ़्लों = तालों), (दहाने = मुँह, छेद)

बोल ये थोड़ा वक़्त बहुत है
जिस्म-ओ-ज़बाँ की मौत से पहले

बोल कि सच ज़िंदा है अब तक
बोल जो कुछ कहना है कह ले

-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Tina Sani



Shabana Azmi 



Fariha Pervez


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