Sunday, February 10, 2019

वो जो तेरे फ़क़ीर होते हैं

वो जो तेरे फ़क़ीर होते हैं
आदमी बे-नज़ीर होते हैं

(बे-नज़ीर = अद्वितीय, अनूठा, निराला)

देखने वाला इक नहीं मिलता
आँख वाले कसीर होते हैं

(कसीर = अधिक, प्रचुर, बहुत)

जिन को दौलत हक़ीर लगती है
उफ़! वो कितने अमीर होते हैं

(हक़ीर = तुच्छ, बहुत कम)

जिन को क़ुदरत ने हुस्न बख़्शा हो
क़ुदरतन कुछ शरीर होते हैं

(शरीर = चंचल, शोख़, उपद्रवी)

ज़िंदगी के हसीन तरकश में
कितने बे-रहम तीर होते हैं

वो परिंदे जो आँख रखते हैं
सब से पहले असीर होते हैं

(असीर = बंदी, क़ैदी)

फूल दामन में चंद रख लीजे
रास्ते में फ़क़ीर होते हैं

है ख़ुशी भी अजीब शय लेकिन
ग़म बड़े दिल-पज़ीर होते हैं

(दिल-पज़ीर = सुखद, आनंददायक, दिलपसंद, मनभावन)

ऐ 'अदम' एहतियात लोगों से
लोग मुनकिर-नकीर होते हैं

(मुनकिर-नकीर = दो फ़रिश्ते जो मृतक से सवालात करते हैं)

-अब्दुल हमीद अदम

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