कुछ शेर गुलाब पर... निमीशकुमार पंड्या जी के सौजन्य से
1)
वो पास बैठे तो आती है दिलरुबा ख़ुश्बू
वो अपने होठों पे खिलते गुलाब रखते है ।
~हसरत जयपुरी
2)
क़दम क़दम पे बिछे हैं गुलाब पलकों के
चले भी आओ कि हम इंतिज़ार करते हैं।
~कामिल जनेटवी
3)
मैं चाहता था कि उसको गुलाब पेश करूँ
वो ख़ुद गुलाब था उसको गुलाब क्या देता
~अफ़ज़ल इलाहाबादी
4)
नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
~मीर तक़ी मीर
5)
गोरा मुखड़ा ये सुर्ख़ गाल तेरे, चांदनी में गुलाब देखा है
नर्गिसी आंख ज़ुल्फ़ शबरंगी, बादलों का जवाब देखा है
~क़मर जलालाबादी
6)
सजन तुम सुख सेती खोलो नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
कि ज्यों गुल से निकसता है गुलाब आहिस्ता आहिस्ता
~वली दक्कनी
7)
ख़याले-यार तिरे सिलसिले नशे की रुतें
जमाले-यार तिरी झलकियाँ गुलाब के फूल
~माजिद अमजद
ख़याले-यार=प्रियतमा की कल्पना; जमाले-यार= प्रियतमा के सौन्दर्य
8
कौन छू कर इन्हें गुज़रा कि खिले जाते हैं
इतने सरशार तो पहले न थे होठों के गुलाब
'~परवीन शाकिर'
9)
लो हमारा जवाब ले जाओ
ये महकता गुलाब ले जाओ
रात जो सौंपने चली है मुझे
तुम भी थोड़े से ख्वाब ले जाओ
~अलीना इतरत रिज़्वी
10)
तस्वीर मैंने मांगी थी शोख़ी तो देखिये,
इक फूल उसने भेज दिया है गुलाब का !
~शादानी
11)
गुलाब की कली 'सीमा' निखरी है जब
तुम्हारे इश्क़ की शबनम की बूँद पी मैंने
~सीमा शर्मा मेरठी
12)
गुलाब था कि महकने लगा मुझे छू कर
कलाई थी कि बहुत मरमरीं हुई मुझ से
~आतिफ़ कमाल राना
13)
गुलाब चेहरे पे मुस्कुराहट
चमकती आँखों में शोख़ जज़्बे
वो जब भी कॉलेज की सीढ़ियों से
सहेलियों को लिए उतरती
तो ऐसे लगता था जैसे दिल में उतर रही हो......
~अमजद इस्लाम अमजद
14)
महक रहे हैं फ़ज़ाओं में बेहिसाब से हम
क़रीब आ के तेरे हो गये गुलाब से हम
दिखाई दे न हमें और कुछ सिवा तेरे
उठा रहे हैं, नजर अपनी इस हिसाब से हम
~तुफैल चतुर्वेदी
15)
दिल में छप कर भी ख़ुशबुएँ देगी
हर तमन्ना गुलाब है प्यारे
~नवनीत शर्मा
16)
मैं ने पूछा कि प्यार है मुझ से
उस ने कर दी गुलाब की बारिश
~अमित अहद
17)
कभी गुलाब से आने लगी महक उस की
कभी वो अंजुम ओ महताब से निकल आया
~महबूब ज़फ़र
18)
अपने दिमाग़ में तो अब ये बसी हुई है
बेहतर तिरे पसीने से हो गुलाब शायद
~हफ़ीज़ जौनपुरी
19)
वो क़हर था कि रात का पत्थर पिघल पड़ा
क्या आतिशीं गुलाब खिला आसमान पर
~ज़फ़र इक़बाल
20)
ख़याल-ए-हुस्न की मख़मल पे तार-ए-इम्काँ से
कभी गुलाब कभी माहताब बुनता हूँ
~कामरान नदीम
21)
अटा है धूल से कमरा है ताक़ भी सूना
कभी गुलाब सजे थे चराग़ जलता था
~क़य्यूम ताहिर
22)
काँटों के ख़ौफ़ से भी लरज़ते हो तुम 'मुनीर'
और घर भी चाहते हो सजाना गुलाब से
~मुनीर सैफ़ी
23)
बड़ी अजीब महक साथ ले के आई है
नसीम, रात बसर की किसी गुलाब के साथ
फ़िज़ा में दूर तक मरहबा के नारे हैं
गुज़रने वाले हैं कुछ लोग याँ से ख़्वाब के साथ
~शहरयार
24)
गुनाह मेरे याद कर के ज़ख़्म सारे हँस पड़े
लहू लहू बदन मिरा खिला गुलाब हो गया
~सुहैल अहमद ज़ैदी
25)
तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब ना हो सकीं
तेरी याद शाखे गुलाब है जो हवा चली तो लचक गयी
~डॉ. बशीर बद्र
26)
शाख़-ए-गुलाब लगती है डाली बबूल की
मौसम के साथ सारी लचक ख़त्म हो गई
~मासूम अंसारी
27)
मैं जितनी बार पढ़ूँ कैसे कैसे रंग भरूँ
तिरा गुलाब सा चेहरा मुझे किताब लगे
~जमील मलिक
28)
सुब्ह को आप हैं गुलाब का फूल
दोपहर को है आफ़्ताब का रंग
~अकबर इलाहाबादी
29)
उसे न देख महकता हुआ गुलाब है वो
न जाने कितनी निगाहों का इंतिख़ाब है वो
~अफ़ज़ल इलाहाबादी
30)
हम को वापस करें हमारा गुलाब
भीड़ की सम्त क्यूं उछालते हैं......
~ शारिक़ कैफ़ी
31)
ये रख रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं
बिछड़ते वक़्त भी तुझको गुलाब दूंगा मैं
~ख़ुर्रम आफ़ाक़
32)
जता दिया के मोहब्बत में ग़म भी होते हैं
दिया गुलाब तो काँटे भी थे गुलाब के साथ
~रहमान फ़ारिस
33)
दिल का खानाख़राब करते हैं
प्यार कुछ बेहिसाब करते हैं
सबसे एक फूल मांगना कैसा
आज ख़ुद को गुलाब करते हैं !
~ध्रुव गुप्त
34)
पहले ये पीलापन तो नहीं था गुलाब में
लगता है अबके गमले की मिट्टी बदल गई ।
~हसीब सोज़
35)
'अनवर' मिरी नज़र को ये किस की नज़र लगी
गोभी का फूल... मुझको लगे है गुलाब का ।
~ अनवर मसूद
36)
मेरा सुख़न भी चमन दर चमन शफ़क़ की फुवार
तेरा बदन भी महकते गुलाब जैसा है..!!
~मोहसिन नक़वी
37)
सुनो के अब गुलाब देंगे गुलाब लेंगे
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा
~जावेद अनवर
38)
भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब....
कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है....!!
~अहमद फ़राज़
39)
बदन में आग है चेहरा गुलाब जैसा है
कि ज़हरे-ग़म का नशा भी शराब जैसा है
~अहमद फ़राज़
40)
बंद-ए-क़बा में बाँध लिया ले के दिल मिरा
सीने पे उस के फूल खिला है गुलाब का
~अहमद हुसैन माइल
41)
हर पत्ता ना-आसूदा है, माहौल-ए-चमन आलूदा है
रह जाएँ लरज़ती शाख़ों पर, दो चार गुलाब तो अच्छा हो
~ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
ना-आसूदा=तक़लीफ़-देह, परेशान;आलूदा=सना हुआ
42)
ख़िज़ां की रुत में गुलाब लहजा बनाके रखना, कमाल ये है
हवा की ज़द पे दिया जलाना, जला के रखना, कमाल ये है
~मुबारक सिद्दीक़ी
43)
ज़ुल्फ़-अंगडाई-तबस्सुम-चाँद-आईना-गुलाब
भुखमरी के मोर्चे पर ढल गया इनका शबाब
~अदम गोंडवी
1)
वो पास बैठे तो आती है दिलरुबा ख़ुश्बू
वो अपने होठों पे खिलते गुलाब रखते है ।
~हसरत जयपुरी
2)
क़दम क़दम पे बिछे हैं गुलाब पलकों के
चले भी आओ कि हम इंतिज़ार करते हैं।
~कामिल जनेटवी
3)
मैं चाहता था कि उसको गुलाब पेश करूँ
वो ख़ुद गुलाब था उसको गुलाब क्या देता
~अफ़ज़ल इलाहाबादी
4)
नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
~मीर तक़ी मीर
5)
गोरा मुखड़ा ये सुर्ख़ गाल तेरे, चांदनी में गुलाब देखा है
नर्गिसी आंख ज़ुल्फ़ शबरंगी, बादलों का जवाब देखा है
~क़मर जलालाबादी
6)
सजन तुम सुख सेती खोलो नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
कि ज्यों गुल से निकसता है गुलाब आहिस्ता आहिस्ता
~वली दक्कनी
7)
ख़याले-यार तिरे सिलसिले नशे की रुतें
जमाले-यार तिरी झलकियाँ गुलाब के फूल
~माजिद अमजद
ख़याले-यार=प्रियतमा की कल्पना; जमाले-यार= प्रियतमा के सौन्दर्य
8
कौन छू कर इन्हें गुज़रा कि खिले जाते हैं
इतने सरशार तो पहले न थे होठों के गुलाब
'~परवीन शाकिर'
9)
लो हमारा जवाब ले जाओ
ये महकता गुलाब ले जाओ
रात जो सौंपने चली है मुझे
तुम भी थोड़े से ख्वाब ले जाओ
~अलीना इतरत रिज़्वी
10)
तस्वीर मैंने मांगी थी शोख़ी तो देखिये,
इक फूल उसने भेज दिया है गुलाब का !
~शादानी
11)
गुलाब की कली 'सीमा' निखरी है जब
तुम्हारे इश्क़ की शबनम की बूँद पी मैंने
~सीमा शर्मा मेरठी
12)
गुलाब था कि महकने लगा मुझे छू कर
कलाई थी कि बहुत मरमरीं हुई मुझ से
~आतिफ़ कमाल राना
13)
गुलाब चेहरे पे मुस्कुराहट
चमकती आँखों में शोख़ जज़्बे
वो जब भी कॉलेज की सीढ़ियों से
सहेलियों को लिए उतरती
तो ऐसे लगता था जैसे दिल में उतर रही हो......
~अमजद इस्लाम अमजद
14)
महक रहे हैं फ़ज़ाओं में बेहिसाब से हम
क़रीब आ के तेरे हो गये गुलाब से हम
दिखाई दे न हमें और कुछ सिवा तेरे
उठा रहे हैं, नजर अपनी इस हिसाब से हम
~तुफैल चतुर्वेदी
15)
दिल में छप कर भी ख़ुशबुएँ देगी
हर तमन्ना गुलाब है प्यारे
~नवनीत शर्मा
16)
मैं ने पूछा कि प्यार है मुझ से
उस ने कर दी गुलाब की बारिश
~अमित अहद
17)
कभी गुलाब से आने लगी महक उस की
कभी वो अंजुम ओ महताब से निकल आया
~महबूब ज़फ़र
18)
अपने दिमाग़ में तो अब ये बसी हुई है
बेहतर तिरे पसीने से हो गुलाब शायद
~हफ़ीज़ जौनपुरी
19)
वो क़हर था कि रात का पत्थर पिघल पड़ा
क्या आतिशीं गुलाब खिला आसमान पर
~ज़फ़र इक़बाल
20)
ख़याल-ए-हुस्न की मख़मल पे तार-ए-इम्काँ से
कभी गुलाब कभी माहताब बुनता हूँ
~कामरान नदीम
21)
अटा है धूल से कमरा है ताक़ भी सूना
कभी गुलाब सजे थे चराग़ जलता था
~क़य्यूम ताहिर
22)
काँटों के ख़ौफ़ से भी लरज़ते हो तुम 'मुनीर'
और घर भी चाहते हो सजाना गुलाब से
~मुनीर सैफ़ी
23)
बड़ी अजीब महक साथ ले के आई है
नसीम, रात बसर की किसी गुलाब के साथ
फ़िज़ा में दूर तक मरहबा के नारे हैं
गुज़रने वाले हैं कुछ लोग याँ से ख़्वाब के साथ
~शहरयार
24)
गुनाह मेरे याद कर के ज़ख़्म सारे हँस पड़े
लहू लहू बदन मिरा खिला गुलाब हो गया
~सुहैल अहमद ज़ैदी
25)
तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब ना हो सकीं
तेरी याद शाखे गुलाब है जो हवा चली तो लचक गयी
~डॉ. बशीर बद्र
26)
शाख़-ए-गुलाब लगती है डाली बबूल की
मौसम के साथ सारी लचक ख़त्म हो गई
~मासूम अंसारी
27)
मैं जितनी बार पढ़ूँ कैसे कैसे रंग भरूँ
तिरा गुलाब सा चेहरा मुझे किताब लगे
~जमील मलिक
28)
सुब्ह को आप हैं गुलाब का फूल
दोपहर को है आफ़्ताब का रंग
~अकबर इलाहाबादी
29)
उसे न देख महकता हुआ गुलाब है वो
न जाने कितनी निगाहों का इंतिख़ाब है वो
~अफ़ज़ल इलाहाबादी
30)
हम को वापस करें हमारा गुलाब
भीड़ की सम्त क्यूं उछालते हैं......
~ शारिक़ कैफ़ी
31)
ये रख रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं
बिछड़ते वक़्त भी तुझको गुलाब दूंगा मैं
~ख़ुर्रम आफ़ाक़
32)
जता दिया के मोहब्बत में ग़म भी होते हैं
दिया गुलाब तो काँटे भी थे गुलाब के साथ
~रहमान फ़ारिस
33)
दिल का खानाख़राब करते हैं
प्यार कुछ बेहिसाब करते हैं
सबसे एक फूल मांगना कैसा
आज ख़ुद को गुलाब करते हैं !
~ध्रुव गुप्त
34)
पहले ये पीलापन तो नहीं था गुलाब में
लगता है अबके गमले की मिट्टी बदल गई ।
~हसीब सोज़
35)
'अनवर' मिरी नज़र को ये किस की नज़र लगी
गोभी का फूल... मुझको लगे है गुलाब का ।
~ अनवर मसूद
36)
मेरा सुख़न भी चमन दर चमन शफ़क़ की फुवार
तेरा बदन भी महकते गुलाब जैसा है..!!
~मोहसिन नक़वी
37)
सुनो के अब गुलाब देंगे गुलाब लेंगे
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा
~जावेद अनवर
38)
भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब....
कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है....!!
~अहमद फ़राज़
39)
बदन में आग है चेहरा गुलाब जैसा है
कि ज़हरे-ग़म का नशा भी शराब जैसा है
~अहमद फ़राज़
40)
बंद-ए-क़बा में बाँध लिया ले के दिल मिरा
सीने पे उस के फूल खिला है गुलाब का
~अहमद हुसैन माइल
41)
हर पत्ता ना-आसूदा है, माहौल-ए-चमन आलूदा है
रह जाएँ लरज़ती शाख़ों पर, दो चार गुलाब तो अच्छा हो
~ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
ना-आसूदा=तक़लीफ़-देह, परेशान;आलूदा=सना हुआ
42)
ख़िज़ां की रुत में गुलाब लहजा बनाके रखना, कमाल ये है
हवा की ज़द पे दिया जलाना, जला के रखना, कमाल ये है
~मुबारक सिद्दीक़ी
43)
ज़ुल्फ़-अंगडाई-तबस्सुम-चाँद-आईना-गुलाब
भुखमरी के मोर्चे पर ढल गया इनका शबाब
~अदम गोंडवी
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