ख़याल,
साँस,
नज़र,
सोच,
खोलकर दे दो
लबों से बोल उतारो,
जुबां से आवाज़ें,
हथेलियों से लकीरें उतार कर दे दो
हाँ, दे दो
अपनी ख़ुदी भी
कि ख़ुदा नहीं हो तुम
उतारो रूह से यह जिस्म का हसीं गहना
उठो दुआ से तो आमीन कह के रूह दे दो
-गुलज़ार
साँस,
नज़र,
सोच,
खोलकर दे दो
लबों से बोल उतारो,
जुबां से आवाज़ें,
हथेलियों से लकीरें उतार कर दे दो
हाँ, दे दो
अपनी ख़ुदी भी
कि ख़ुदा नहीं हो तुम
उतारो रूह से यह जिस्म का हसीं गहना
उठो दुआ से तो आमीन कह के रूह दे दो
-गुलज़ार
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