Saturday, February 9, 2013

दुनिया की तलब है, तो क़नाअत ही न करना,
क़तरे ही से ख़ुश हो, तो समंदर न मिलेगा ।

(क़नाअत = सन्तोष)

-वसीम बरेलवी
 

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