mir-o-ghalib
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Spiritual Science
Saturday, February 9, 2013
दुनिया की तलब है, तो क़नाअत ही न करना,
क़तरे ही से ख़ुश हो, तो समंदर न मिलेगा ।
(क़नाअत = सन्तोष)
-वसीम बरेलवी
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