Saturday, February 27, 2016

मन बैरागी, तन अनुरागी, कदम-कदम दुश्वारी है

मन बैरागी, तन अनुरागी, कदम-कदम दुश्वारी है
जीवन जीना सहल न जानो बहुत बड़ी फनकारी है

(सहल = सहज, आसान)

औरों जैसे होकर भी हम बा-इज़्ज़त हैं बस्ती में
कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है

(अय्यारी = चालाकी, धूर्तता)

जब-जब मौसम झूमा हम ने कपड़े फाड़े शोर किया
हर मौसम शाइस्ता रहना कोरी दुनियादारी है

(शाइस्ता = सभ्य, शिष्ट)

ऐब नहीं है उसमें कोई, लाल परी न फूल गली
यह मत पूछो, वह अच्छा है या अच्छी नादारी

(नादारी = गरीबी, निर्धनता)

जो चेहरा देखा वह तोड़ा, नगर-नगर वीरान किए
पहले औरों से नाखुश थे अब खुद से बेज़ारी है

(बेज़ारी = अप्रसन्नता, नाराज़गी)


- निदा फ़ाज़ली

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