Saturday, May 7, 2016

चलो उन राहों पे जिनपे कोई चला न हो

चलो उन राहों पे जिनपे कोई चला न हो
करो भला भले खुद का कोई भला न हो

मिलो सभी से हरदम मुस्कुराते हुए
तुमसे हंसकर चाहे कोई मिला न हो

हर फ़िक्र भुला के जियो इस तरह
सिर्फ खुशियां हों कोई मसअला न हो

हमदर्द बन के मिलो उस बागबां से
फूल चमन में जिसके कोई खिला न हो

बन के नूर छा जाओ अंधेरों पे तुम
चराग़ जिन घरों में कभी जला न हो

बिखर जाएगा दामन पे बन के अब्र
वो अश्क़ जो मोतियों में ढला न हो

आंधियां हालात की उड़ा ले जाएंगीं उसे
फौलाद हो के जो आग से निकला न हो

गैर के दर्द से क्या होंगीं आँखे नम
मोम की मानिंद जो कभी पिघला न हो

हर एक से दुखी रहेगा ज़माने में वो
साथ ज़माने के जो कभी बदला न हो

ये हुनर तुमको सिखाएगा 'विकास'
कैसे हंसना जैसे किसी ने छला न हो

- विकास

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