Thursday, September 15, 2016

बहुत सँभाल के रक्खी तो पामाल हुई
सड़क पे फेंक दी तो ज़िंदगी निहाल हुई
-दुष्यंत कुमार
(पामाल = पाँव तले रौंदी हुई, दुर्दशाग्रस्त)

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