Wednesday, March 13, 2019

दामन झटक के वादी-ए-ग़म से गुज़र गया
उठ उठ के देखती रही गर्द-ए-सफ़र मुझे
-अली सरदार जाफ़री

(गर्द-ए-सफ़र = यात्रा की धूल)

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