Tuesday, March 12, 2019

वाइज़ कभी तो इश्क़-ओ-मुहब्बत की बात कर
हर रोज़ कुफ़्र-ओ-दीं का फ़साना फ़ुज़ूल है

(वाइज़ = धर्मोपदेशक), (कुफ़्र-ओ-दीं = पाप और पुण्य, धर्म-अधर्म)

इरफ़ान-ए-ज़िन्दगी की तलब है तो दिल में झाँक
दैर-ओ-हरम के फेर में आना फ़ुज़ूल है

(इरफान-ए-ज़िन्दगी = ज़िंदगी का ज्ञान), (दैर-ओ-हरम = मंदिर और मस्जिद)

-राजकुमार "क़ैस"

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