Friday, March 15, 2019

गो आबले हैं पाँव में फिर भी ऐ रहरवो
मंज़िल की जुस्तुजू है तो जारी रहे सफ़र
-नूर क़ुरैशी

(आबले = छाले), (रहरवो = यात्रियों), (जुस्तुजू = खोज, तलाश)

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