ये बारे ग़म उठा कर देखते हैं
तुम्हें भी आज़मा कर देखते हैं।
(बारे ग़म = ग़म का बोझ)
बड़ा है ज़ोम इस पागल हवा को
दिये हम भी जला कर देखते हैं।
(ज़ोम = घमंड)
है मुमकिन ज़िन्दगी आए समझ अब
दोबारा सर खपा कर देखते हैं।
हमारे ज़ख़्म का क्या हाल है वो
गले हमको लगा कर देखते हैं।
यकीं दुनिया पे फिर होने लगा है
चलो फ़िर चोट खा कर देखते हैं।
पिघलती ही नहीं अश्क़ों से दुनिया
ज़रा सा मुस्कुरा कर देखते हैं।
मुख़ालिफ़ इश्क़ के तुम हो जो "वाहिद"
तुम्हारी नस दबा कर देखते हैं।
(मुख़ालिफ़ = विरोधी)
-विकास"वाहिद"
१४/०३/१९
तुम्हें भी आज़मा कर देखते हैं।
(बारे ग़म = ग़म का बोझ)
बड़ा है ज़ोम इस पागल हवा को
दिये हम भी जला कर देखते हैं।
(ज़ोम = घमंड)
है मुमकिन ज़िन्दगी आए समझ अब
दोबारा सर खपा कर देखते हैं।
हमारे ज़ख़्म का क्या हाल है वो
गले हमको लगा कर देखते हैं।
यकीं दुनिया पे फिर होने लगा है
चलो फ़िर चोट खा कर देखते हैं।
पिघलती ही नहीं अश्क़ों से दुनिया
ज़रा सा मुस्कुरा कर देखते हैं।
मुख़ालिफ़ इश्क़ के तुम हो जो "वाहिद"
तुम्हारी नस दबा कर देखते हैं।
(मुख़ालिफ़ = विरोधी)
-विकास"वाहिद"
१४/०३/१९
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