mir-o-ghalib
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Spiritual Science
Saturday, March 9, 2019
आए तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबान
भूले तो यूँ कि गोया कभी आश्ना न थे
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
(आश्ना = दोस्त, परिचित, प्रेमी, महबूब)
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