Saturday, March 9, 2019

आए तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबान
भूले तो यूँ कि गोया कभी आश्ना न थे
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

(आश्ना = दोस्त, परिचित, प्रेमी, महबूब)

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