Sunday, March 10, 2019

ज़र्रा समझ के यूँ न मिला मुझ को ख़ाक में
ऐ आसमान मैं भी कभी आफ़्ताब था
-लाला माधव राम जौहर

(आफ़्ताब = सूरज)

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