Wednesday, April 27, 2016

हर किसी को यहाँ मेहमाँ नहीं करते प्यारे

हर किसी को यहाँ मेहमाँ नहीं करते प्यारे
दिल की बस्ती को बियाबां नहीं करते प्यारे

भूल जाओ कि यहाँ कोई कभी रहता था
दीद-ओ-दिल को परेशाँ नहीं करते प्यारे

(दीदा-ओ-दिल = आँखें और दिल)

तुम से देखी नहीं जाती हैं छलकती आँखें
तुम किसी पर कोई एहसाँ नहीं करते प्यारे

कुछ तकल्लुफ़ भी ज़रूरी है ज़माने के लिए
खुद को सब के लिए आसाँ नहीं करते प्यारे

काम आते हैं अँधेरे में दिये भी अक्सर
हर जगह दिल को फ़रोज़ाँ नहीं करते प्यारे

(फ़रोज़ाँ = प्रकाशमान, रौशन)

लोग हाथों में नमकदान लिए फिरते हैं
अपने ज़ख्मों को नुमायाँ नहीं करते प्यारे

ज़िन्दगी ख़्वाबे-मुसलसल का सफ़र है 'आलम'
खुद को ख्वाबों से गुरेज़ाँ नहीं करते प्यारे

(गुरेज़ाँ = भागना, बचकर निकलना)

-आलम खुर्शीद

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